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बकरी पालन में कमाई

बकरी पालन (bakari palan) किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली व्यवसाय है। इसे छोटे स्तर से लेकर बड़े स्तर तक किसान आसानी से कर सकते हैं। जो किसान गाय-भैंस पालन करने में असमर्थ हैं वे छोटे स्तर पर बकरी पालन (Goat farming) की शुरूआत कर सकते हैं।

 

बकरी को ‘गरीबों की गाय कहा’ जाता है, भारत में अब अधिकांश युवा किसान परम्परागत बकरी पालन को छोड़कर आधुनिक बकरी पालन कर रहे हैं। 


आधुनिक बकरी पालन क्या है? (बकरी पालन का तरीका)

पहले किसान खेती के साथ मात्र 5-10 बकरियों को पालते थे, जिससे ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता था। परन्तु अब किसान इसे व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं। इसके लिए अलग से मुर्गी पालन की तरह ही शेड का निर्माण कर ज्यादा बकरियां एक साथ रखते हैं। अब बकरी पालन का तरीका (bakri palan ka tarika) भी आधुनिक हो गया है। इसे ही व्यवसायिक बकरी पालन  (commercial goat farming) कहते हैं। 

आसान भाषा में कहें तो थोड़ी ट्रेनिंग और कुछ ज्यादा पूंजी लगाकर उन्नत तरीके से बकरी पालन करना ही 'आधुनिक बकरी पालन' (aadhunik bakri palan) कहलाता है।

व्यवसायिक बकरी पालन (commercial goat farming) के लिए सरकार भी किसानों की मदद कर रही है। इसके लिए आप बकरी पालन योजना के लिए अप्लाई कर सकते हैं। व्यवसायिक बकरी पालन (commercial goat farming) के लिए सरकार पशुपालकों को ट्रेनिंग और सब्सिडी देती है। 

👉आपको बता दें, 2030 तक बकरी पालन को और अधिक सफल बनाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाओं के तहत नए पशुपालकों को धन मुहैया करा रही है। बकरी पालन के लिए लोन (bakri palan loan yojana) कैसे मिलेगा इस जानकारी के लिए आप अपने जिले के पशुधन अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

बकरी पालन में कमाई (goat farming income)

मुर्गी पालन के बाद बकरी पालन (bakari palan) किसानों का पसंदीदा व्यवसाय बनता जा रहा है। कम लागत और ज्यादा मुनाफा के कारण बकरी पालन पिछले कुछ सालों में वृद्धि देखी जा सकती है। चूंकि मुर्गी पालन में ज्यादा देखभाल और दवाओं की जरूरत होती है। मुर्गी पालन में बर्ड फ्लू जैसी कई बीमारियों का भी खतरा ज्यादा रहता है। यदि बकरी पालन (bakari palan) अच्छी तरह से किया जाए तो बकरियों में रोग लगने की संभावना कम रहती है। 

बकरी का मांस और दूध बेचकर आप अच्छा मुनाफा पा सकते हैं। यदि आप इसकी शुरूआत 10-20 बकरियों से  करें तो 2 साल के अंदर आपके पास 200 से भी ज्यादा बकरियों की संख्या हो सकती है, जिससे आप लाखों की कमाई कर सकते हैं। 

बकरी पालन क्यों चुनें?(Why choose goat farming?)

बकरी पालन (bakari palan) को शुरू करने के लिए अधिक धन और श्रम की आवश्यकता नहीं होती है। इस बिजनेस को एक या दो लोगों से आसानी से किया जा सकता है। 
बकरी पालन उन बेरोजगार युवाओं, छोटे किसानों और पशुपालकों के लिए एक अच्छा व्यवसाय हो सकता है, जिनके पास खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए बहुत पैसा नहीं है। 
बकरी पालन को यदि प्रशिक्षण प्राप्त कर इस बिजनेस को शुरूआत की जाए तो और अधिक लाभ होता है। जिससे आपको बकरी पालन (bakari palan) की सभी आधुनिक प्रशिक्षण प्राप्त हो जाता है। जिसके लिए सरकार समय-समय पर बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण भी देती है। 

बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण केंद्र (Goat rearing training center)

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा

आपको बता दें, भारत में बकरियों पर अनुसंधान के लिए उत्तर प्रदेश के मथुरा में केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की स्थापना की गई है। जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) का एक प्रमुख अनुसंधान संस्थान है। 

यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। यह संस्था किसानों, बेरोजगार युवाओं और छोटे उद्यमियों के लाभ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बकरी पालन प्रशिक्षण आयोजित करता है। 

अधिक जानकारी के लिए आप इस संस्थान के फोन नंबर  0565- 2763320 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा आप संस्थान की वेबसाइट www.cirg.res.in पर विजिट कर भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 


संस्थान का पूरा पता- केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, पोस्ट- फरह-281122, जिला- मथुरा (उ.प्र.) 

बकरी पालन के लाभ


बकरी पालन से लाभ (benefits of goat farming)

बकरी पालन अन्य पशुपालन से कम समय में ज्यादा लाभ है, जो निम्नलिखित है।

  • भैंस-गाय या अन्य पशुपालन की तुलना में बकरी पालन के लिए कम जगह की जरूरत होती है। 
  • यदि आपके पास कम जगह है फिर भी आप बहुत कम जगह पर अधिक बकरियों का प्रबंधन कर सकते हैं।
  • बकरी पालन में अन्य जानवरों की तुलना में बहुत कम भोजन की जरूरत होती है। 
  • इसके लिए आपको कम खर्च की जरूरत होती है।
  • बकरी पालन सभी मौसम और किसी भी की जा सकती है।
  • बकरी 2 साल में 3 बार मां बन सकती है। अतः आप कम समय में बकरियों की संख्या बढ़ा सकते हैं।
  • आजकल मुर्गियों में लगने वाली बीमारियों की वजह से बकरे की मांस की ज्यादा डिमांड है। 
  • बकरी का मांस, दूध और अन्य उत्पाद मानव आहार के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रदान करते हैं। 
  • बकरी के मांस में प्रोटीन ज्यादा होता है, साथ में लौह(आयरन) भी अधिक होता है। 
  • बकरी का दूध डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी को दूर करने के लिए काफी कारगर साबित होता है। 
  • बकरी का दूध पचाना आसान होता है और बच्चों और वयस्कों के लिए यह दूध अच्छा होता है।

बकरी पालन कैसे करें (bakri palan ka tarika)

सबसे बड़ा प्रश्न किसानों का रहता है कि बकरी पालन कैसे करें? बकरी पालन का तरीका क्या है?

सबसे पहले बकरी पालन (bakari palan) की मूल बातें जान लें, जिससे बकरी पालन में ज्यादा मुनाफा हो सके। इससे बड़े स्तर पर बकरी पालन की योजना को शुरू करने में आपकी मदद मिलेगी। बकरी पालन(bakari palan) में शुरू से एक रणनीति से काम करें। इससे आपको इस बिजनेस में नुकसान कम होगा।

नस्ल का चयन

सबसे पहले पशुपालक को यह तय करना जरूरी है कि किस प्रकार की प्रजाति की बकरियों का चयन करना है। नस्ल के चयन में पशुपालक पहले देसी बकरियों का चयन करना चाहिए। कुछ प्रशिक्षण के बाद वे अपनी बजट, और जलवायु के अनुसार अच्छी नस्ल का चुनाव कर सकते हैं। 

शेड का निर्माण 

बकरी पालन के लिए भूमि और शेड का चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है, चूंकि बकरियों को ऊंचे और साफ जगह पसंद होती है। इसके लिए आपको ऊंची भूमि और शेड का चुनाव करना होगा। बकरी पालन के लिए अधिक जगह की आवश्यकता नहीं होती है। आपको शेड का निर्माण वैज्ञानिक रूप से डिजाईन करना होगा। 

बकरियों की भोजन और देखभाल

इन सबके अलावा, आपको भोजन की विशेष देखभाल करनी होगी। एक स्वस्थ्य भोजन आपकी बकरी को स्वस्थ बनाता है। बाजार से खरीदा गया भोजन आपके लिए महंगा हो सकता है। अतः आप घर पर ही स्वयं बकरियों के लिए चारे का उत्पादन कर सकते हैं। 


बकरियों की मार्केटिंग और बाजार

आजकल बाजार में बकरे के मांस की बहुत डिमांड है। इस व्यवसाय के लिए मार्केटिंग की कोई ज्यादा आवश्यतकता नहीं होती है। एक बार ग्राहक को आपके फॉर्म हाउस के बारे में पता चलने पर खुद इन बकरियों को खरीदने के लिए आपके पास आएंगे। 

इसके अलावा आप अन्य बकरी पालकों को बकरी के बच्चों को उनकेके लिए भी बेच सकते हैं। जिससे आपको ज्यादा मुनाफा भी होगा। 


संक्षेप में कहें तो बकरी पालन (bakari palan) किसानों की आय दुगुनी करने के लिए कृषि के साथ-साथ बकरी पालन एक अच्छा व्यवसाय हो सकता है। 

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Papaya farming : पपीते की खेती कैसे करें, यहां जानें
Papaya farming: पपीता (Papaya) एक ऐसा फल है जो कच्चा और पके दोनों ही रुपों में उपयोगी होता है। भारत में पपीता की खेती (papita ki kheti) आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, असम, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू कश्मीर और मिजोरम में खूब होती है। इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है।

पपीते की औषधीय गुणों की बात करें तो इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। इसमें कई पाचक एन्जाइम होते हैं जो पेट की बीमारियों को दूर करने में सहायक होते हैं। पपीते के औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसकी डिमांड सालभर रहती है।

कम लागत में अगर ज्यादा मुनाफे की बात की जाए तो पपीता की खेती (papita ki kheti) एक अच्छा विकल्प है।

तो आइए, The Rural India के इस ब्लॉग में पपीता की खेती (papita ki kheti) को करीब से समझें।

यहां आप जानेंगे

· पपीता के लिए ज़रूरी जलवायु
· उपयोगी मिट्टी
· पपीता की खेती का सही समय
· खेती की तैयारी कैसे करें?
· पपीता की उन्नत किस्में
· पपीता की खेती से कमाई

तो आइए सबसे पहले पपीता (papaya) के लिए सही जलवायु (Climate) के बारे में जानते हैं।

पपीता के लिए आवश्यक जलवायु

पपीते की खेती गर्म और नमीयुक्त जलवायु में की जाती है। इसे अधिकतम 44 तथा न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस में उगाया जा सकता है। पपीते की खेती को सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी से होता है तो वह है लू और पाला।

यह जल्दी बढ़ने वाला पौधा है। साधारण नमी युक्त भूमी और अच्छी धूप में यह पेड़ तेजी से बढ़ता है। परन्तु अत्यधिक मात्रा में जल और क्षारीय भूमी पपीते के पेड़ के लिए नुकसानदायक साबित होते हैं।

पपीते की किस्में

पपीता की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

यह पेड़ हल्की दामोट या दामोट वाली मीट्टी में अच्छे से पनपता है। इसकी अच्छी खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.5 होना चाहिए। जैसा कि हम जानते हैं कि पपीते को ज्यादा पानी रास नही आता इसीलिए इसकी खेती के चिकनी या जलभराव वाली मिट्टी बिलकुल भी उचित नहीं माना जाता है। लेकिन इसे लाल, पीली और काली मिट्टी में आसानी से उगाया जा सकता है।

पपीता की खेती का सही समय

पपीता तो बारहों महीने में मिलता है लेकिन इसका उचित स्वाद इसके उचित समय की पैदावार में ही होता है। पपीते की खेती के लिए उचित समय फरवरी और मार्च और अक्टूबर के मध्य में होता है।

खेती की तैयारी

पपीते की खेती (Papaya farming) के लिए सबसे पहले किसानों को खेत को अच्छी तरह से जोतना चाहिए तथा खेत को समतल करना चाहिए। पपीते के खेती के लिए मिट्टी होना आवश्यक है। पपीते का बीज डालने से पहले बीजों का दवाइयों द्वारा उपचार कर लें। इसके बाद बीजों को समान दूरी पर लगाएं।


पपीतों में भी कई प्रजातियां पाई जाती हैं। भारत में संकर प्रजाति काफी तेजी से फैल रही है और आजकल इसकी डिमांड भी ज्यादा है। देश में पपीते की बहुत सी किस्मों का अच्छा उत्पादन होता है जिसमें ताइवान किस्म के पपीते सबसे ज्यादाअच्छे माने जाता है।

पूसा डोलसियरा, पूसा मेजेस्टी, रेड लेडी-786, सोलो, सिलोन, कयोम्बटूर-4 वाशिंगटन इत्यादी यह विभिन्न पपीते की किस्मों में आती हैं ।

सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन

जैसा कि हम जानते हैं कि पपीते की खेती (Papita ki kheti) को ज्यादा पानी की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन समय समय पर इसकी सिंचाई होनी चाहिए। हमें जानते हैं कि पपीते का पेड़ नमी वाली मीट्टी में अच्छे से पनपता है इसीलिए मिट्टी की नमी बरकरार रखने के लिए हमें समय समय पर सिंचाई करनी चाहिए।

सर्दियों में 12 से 15 दिन पर और गर्मियों में 5 से 8 दिनों पर सिंचाई होनी चाहिए। बरसात के मौसम में सिंचाई की जरूरत नही होती है लेकिन भारत के कुछ हिस्से कई बार सूखे से ग्रस्त रहते हैं तो ऐसी जगहों पर बरसात के मौसम में भी सिंचाई की आवश्यकता होती है।

पपीते के पेड़ में ज्यादा कीड़ें नहीं पाये जाते हैं लेकिन इसको सबसे ज्यादा नुकसान लू और पाले से होता है। वायरस भी पपीते के पेड़ को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके लिए नाइट्रोजन, फॉस्फरस और पोटाश को समय पर डाल देना चाहिए। मिट्टी में खाद को अच्छी मात्रा में मिलाकर ही पौधों का रोपण करना चाहिए। ठंड़ के मौसम में अगर पाला पड़ने की आशंका है तो शाम को ही धुंआ कर देना चाहिए और अगर हो सके तो थोड़ी सिंचाई भी कर देनी चाहिए।

पपीता की खेती में लागत और कमाई

पपीते का एक स्वस्थ पेड़ एक सीजन में लगभग 40 किलो पपीते देता है। इसीलिए अगर किसान अच्छे पपीते की फसल लगातें हैं जैसे संकर किस्म जो कि अच्छी क्वॉलिटी माना जाता है तो साल में लगभग 6 से 8 लाख रूपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। थोक बाजार में एक किलो पपीते कि कीमत 10 रूपये के लगभग मिलते हैं तो इस हिसाब से एक क्विंटल पर 1000 रूपये तक मिल सकता है।

अगर एक सीजन में आप 80 से 100 क्विंटल पैदा करते हैं तो आप एक सीजन में लगभग 10 लाख रूपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं।

अगर किसान मेहनत और लगन से पपीते की अच्छी पैदावार करते हैं तो किसानों को आर्थिक समस्याओं का सामना नही करना पड़ेगा। पपीते की खेती आज के समय में किसानों के लिए एक अच्छा आय का श्रोत माना जाता है और कम लागत में मोटी कमाई भी कर सकते हैं।

ये तो थी पपीते की खेती (Papita ki kheti) की बात। लेकिन, The Rural India पर आपको कृषि एवं मशीनीकरण, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर भी कई महत्वपूर्ण ब्लॉग्स मिलेंगे, जिनको पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं और दूसरों को भी इस लेख को शेयर कर सकते हैं।

अगर आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा हो, तो इसे मित्रों तक जरूर पहुंचाए। जिससे अन्य किसान मित्र भी पपीते की खेती (Papita ki kheti) का लाभ उठा सकें। 


पपीता की खेती पर एक्सपर्ट की सलाह


पपीता की खेती पर एक्सपर्ट की सलाह

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sarpanch : सरपंच के कार्य की लिस्ट और अधिकार, यहां जानें

भारत गांवों का देश है। हमारे देश में लगभग साढ़े छह लाख से अधिक गांव हैं। इन गांवों में सरपंच (sarpanch) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय स्वशासन (local self-government) में सरपंच सर्वोच्च ग्राम पंचायत प्रतिनिधि होता है। 


कई राज्यों में सरपंच को ग्राम प्रधान (gram pradhan), मुखिया (mukhiya), ग्राम सेवक या विलेज़ हेड (village head) भी कहते हैं। पंचायती राज प्रणाली (panchayati raj system) में गांवों के विकास में सरपंचों का विशेष योगदान होता है। आपको बता दें, पंचायती राज अधिनियम- 1992 में सरपंच (sarpanch) यानी ग्राम प्रधान (gram pradhan) को कई जिम्मेदारी और अधिकार दिए गए हैं। इन पंचायतों का प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी स्वयं ग्रामवासियों को दी गई है। जिसे ‘गांव की सरकार’ भी कहते हैं।


तो आइए ‘द रुरल इंडिया’ के इस लेख में सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav), सरपंच की सैलरी (sarpanch ki salary), सरपंच के कार्य की लिस्ट और सरपंच के अधिकार को विस्तार से जानें। 


सरपंच की भूमिका (importance of sarpanch)

जैसा कि हम सभी जानते हैं, प्राचीन काल से ही भारत के सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक जीवन में पंचायतों का महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्थानीय लोकतंत्र में सरपंच पद (sarpach post) बहुत ही प्रतिष्ठित और गरिमापूर्ण है। सरपंच ग्रामसभा द्वारा निर्वाचित ग्राम पंचायत का सर्वोच्च प्रतिनिधि होता है। जिसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को विकास के पथ पर ले जाने की होती है।


1992 में संविधान के 73 संशोधन द्वारा इसे और मजूबती मिली है। इसके तहत पंचायतों को कई प्रकार के अधिकार दिए गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार गांवों के विकास के लिए पंचायत निधि में करोड़ों की धनराशि भी उपलब्ध कराती है। आसान भाषा में कहें तो स्थानीय शासन में सरपंच पद (sarpanch post) बहुत ही प्रतिष्ठित और गरिमापूर्ण है। 


सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav)

अब आपके मन में यही सवाल होगा कि पंचायती राज व्यवस्था में सरपंच का चुनाव कैसे होता है? तो आपको बता दें कि 1992 के बाद पूरे भारत में प्रत्येक 5 साल बाद सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav) ग्राम पंचायतों के मतदातों द्वारा होता है। पंचायती चुनाव द्वारा सरपंच को सीधे तौर पर ग्रामीणों द्वारा चुना जाता है। ग्रामीण मतदातों का अपना सरपंच चुनने का पूरा अधिकार होता है। वे अपने मनपसंद उम्मीद्वार को वोट देकर चुन सकते हैं। 


आपको बता दें, सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav) राज्य चुनाव आयोग द्वारा प्रत्येक 5 साल बाद कराया जाता है। यह चुनाव बैलेट पेपर या ईवीएम मशीन द्वारा होता है। आमतौर पर सभी राज्यों में पंचायती चुनाव दलीय आधारित नहीं होता है। इसके लिए चुनाव आयोग अलग से चुनाव चिन्ह आवंटित करती है। हालांकि कुछ राज्यों में यह दलीय आधार पर भी होते हैं। 


सरपंच चुनाव के लिए आरक्षण (reservation for sarpanch election)

जिस तरह से पूरे देश लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में आरक्षण व्यवस्था लागू है उसी तरह ग्राम पंचायत चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था (reservation system) है। पंचायती राज्य अधिनियम-1992 में पंचायती चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत का आरक्षण दिया गया था जिसे 2010 में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी अब प्रत्येक दूसरा पद महिलाओं के लिए आरक्षित है। 


यह व्यवस्था राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव (panchayat chunav) से पहले गांव की जनसंख्या के अनुपात और रोस्टर व्यवस्था (roaster systmem) के आधार पर करती है। जनसंख्या के आधार पर SC/ST/OBC के लिए सीट निर्धारित करती है। 


स्पष्ट है कि गांव में उसी वर्ग का सरपंच (sarpanch) बनता है, जिस वर्ग के लिए पंचायत में सीट आरक्षित की गई है। निर्धारित सीट पर उसी वर्ग की महिला या पुरूष  सरपंच के लिए उम्मीदवार हो सकते हैं।


सरपंच बनने के लिए योग्यता (Eligibility to become Sarpanch)

  • सरपंच बनने के पहली योग्यता है कि उम्मीद्वार उसी ग्राम पंचायत का निवासी हो। 

  • इसके अलावा उम्मीद्वार का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हो।

  • उम्मीद्वार की उम्र 21 साल से कम नहीं होनी चाहिए।

  • सरपंच बनने के लिए कई राज्यों में 8वीं पास या साक्षर होना जरुरी है। लेकिन यह नियम सभी राज्यों में लागू नहीं है। 

  • किसी-किसी राज्यों में 2 बच्चों रखने वाले व्यक्तियों को ही चुनाव लड़ने के लिए योग्य माना गया है।

  • सरकारी कर्मचारी सरपंच का चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

  • वह राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून के अधीन पंचायत का सदस्य निर्वाचित होने के योग्य हो।


सरपंच बनने के लिए आवश्यक डॉक्यूमेंट (Documents required to become Sarpanch)

सरपंच बनने से पहले उम्मीद्वारों को कई डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है। 

जैसे- 

  • मतदाता पहचान पत्र

  • आधार कार्ड या पेन कार्ड 

  • निवास प्रमाण पत्र

  • पासपोर्ट साइज फोटो

  • पुलिस-प्रशासन द्वारा निर्गत चरित्र प्रमाण पत्र

  • आरक्षित श्रेणी का जाति प्रमाण पत्र

  • चल-अचल सम्पति विवरण

  • अभ्यर्थी के परिवार की आर्थिक स्थिति का विवरण

  • शैक्षणिक प्रमाण पत्र

  • 50 रुपए के स्टॉम्प पेपर शपथ-पत्र


इसके अलावा भी अन्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो सकती है, जो पंचायत चुनाव (panchayat chunav) के घोषणा के साथ ही बता दी जाती है। आपको बता दें, ये डाक्यूमेंट्स अलग-अलग राज्यों में अलग भी हो सकते है जिसके लिए आप पंचायत चुनाव के वक्त ब्लॉक/खंड कार्यालय में संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 


सरपंच के कार्य की लिस्ट (list of sarpanch duties)

  • गांव में सड़कों का रखरखाव करना

  • गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना

  • सरकारी योजना का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना

  • पशुपालन, बागवानी को बढ़ावा देना

  • गांव में सिंचाई के साधन की व्यवस्था करना

  • दाह संस्कार और कब्रिस्तान का रखरखाव करना

  • प्राथमिक शिक्षा को बढ़ावा देना

  • खेल का मैदान व खेल को बढ़ावा देना

  • स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाना

  • गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था करना

  • आंगनवाड़ी केंद्र को सुचारु रूप से चलाने में मदद करना 


सरपंच के कार्य और अधिकार (Sarpanch’s work and his rights)

पंचायती राज प्रणाली (panchayati raj system) में सरपंच को कई कार्य और अधिकार प्राप्त है। उसे स्थानीय शासन में कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे कई अधिकार है। गांव में छोटे-मोटे विवादों का निपटारा करना, ग्राम पंचायत के लिए ग्राम स्तर पर कुछ टैक्स लगाने का अधिकार ग्राम प्रधान (सरपंच) को प्राप्त है। सरंपच ग्रामसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है। सरपंच प्रतिवर्ष ग्रामसभा की कम से कम 4 बैठकें आयोजित कर सकता है। सरपंच को सभी वर्गों के लोगों, खासकर SC/ST/OBC और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। 


सरपंच की सैलरी (sarpanch ki salary)

देशभर में लोकसभा और विधानसभा के प्रतिनिधियों की तरह सैलरी और भत्ता के लिए मांग होती रही है। लेकिन कुछ राज्यों में सरपंच की सैलरी (sarpanch ki salary) की जगह पर कुछ मानदेय और भत्ता दी जाती है। पंचायती राज व्यवस्था में अभी तक सरपंचों को किसी प्रकार की सैलरी का प्रावधान नहीं है। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे अधिकांश राज्यों में सरपंचो को सैलरी के रुप में 2,500 से लेकर 5 हजार रुपए तक का मानदेय दिया जाता है। 


सरपंच के खिलाफ शिकायत (complaint against sarpanch)

पंचायती राज व्यवस्था में पंचायती जनप्रतिनिधियों का आरचण और कार्य सही नहीं होने पर उन्हें हटाने का अधिकार ग्रामीणों को ही दिया गया है। लेकिन इसके लिए कुछ प्रक्रिया और प्रावधान निर्थारित किए गए हैं। यदि सरपंच ठीक से काम नहीं कर रहा है तो इसकी लिखित शिकायत जिला पंचायत राज अधिकारी या संबंधित अधिकारी को दें। 


लिखित शिकायत में ग्राम पंचायत के आधे से अधिक वार्ड सदस्यों के हस्ताक्षर होना ज़रूरी होता है। अविश्वास पत्र में सभी कारणों का उल्लेख होना चाहिए। इसके बाद जिला पंचायत राज अधिकारी या संबंधित अधिकारी गांव में एक बैठक बुलाता है जिसकी सूचना कम से कम 15 दिन पहले सरपंच और ग्रामीणों को दी जाती है। अविश्वास प्रस्ताव पर सरपंच, ग्रामीण और वार्ड पंच को बहस का मौका दिया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराया जाता है। यदि दो-तिहाई सदस्य सरपंच के विरोध में वोट करते हैं, तो सरंपच को पद से हटा दिया जाता है। इसके बाद सरपंच का चुनाव (sarpanch ka chunav) होने तक सरपंच की जिम्मेदारी उपसरपंच को दे दी जाती है। 


नोट- पंचायती राज्य व्यवस्था में सरपंच (sarpanch) को हटाने के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं, जिससे अविश्वास प्रस्ताव का दुरुपयोग को रोका जा सके। अधिकांश राज्यों में सरपंच चुनने के 2 वर्ष तक या कार्यकाल के अंतिम 6 महीनों के दौरान अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है। 


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massey ferguson 9500 smart : मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर की कीमत और फीचर्स

किसान भाइयों अगर आप एक मजबूत और टिकाऊ ट्रैक्टर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो मैसी फर्ग्यूसन कंपनी (Massey Ferguson Company) का यह ट्रैक्टर आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता हैं। मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट (massey ferguson 9500 smart) एक मजबूत और टिकाऊ ट्रैक्टरों में से एक है। यह ट्रैक्टर खेत के कठिन कार्य को भी आसानी से कर सकता हैं। 


तो आइए, द रूरल इंडिया के ट्रैक्टर संग्रह (tractor junction) सीरीज़ में मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर की कीमत (massey ferguson 9500 smart tractor price) और फीचर्स के बारे में विस्तार से जानें। 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर (massey ferguson 9500 smart) पर एक नजर


कंपनी ब्रांड

मैसी फर्ग्यूसन

मॉडल

मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट

सिलेंडर संख्या 

3

इंजन हॉर्स पावर

58 HP 

गियर

8 फॉरवर्ड + 2 रिवर्स

ब्रेक 

तेल में डूबे हुए ब्रेक

massey ferguson 9500 smart series price

8.40 लाख से 8.90 लाख*  रुपए तक


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर की इंजन क्षमता


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर(massey ferguson 9500 smart tractor) में 3 सिलेंडर और 2700 CC का बेहतर इंजन दिया गया है।  इस ट्रैक्टर में 58 HP की क्षमता के साथ आपको दिया जाता है।  इसके अलावा इसमें एयर फिल्टर  के लिए ड्राई टाइप दिए गए है। यह ट्रैक्टर PTO hp 56 के साथ आता है। 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर के खास फीचर्स


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट (massey ferguson 9500 smart) में ड्यूल क्लच और  8 फॉरवर्ड + 2 रिवर्स गियर दिए गए है। इस ट्रैक्टर में तेल में डूबे हुए ब्रेक और पावर स्टीयरिंग  के साथ दिए जाता है। 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर (massey ferguson 9500 smart tractor) में डीजल टैंक की क्षमता 70 लीटर दी गई है, जो खेतों के काम में अच्छा माइलेज देता है।  साथ ही इस ट्रैक्टर में RPM [email protected]/1790 ERPM और 12v 88 AH क्षमता की बैटरी दी गई है।

आपको बता दें, मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर (massey ferguson 9500 smart tractor) का कुल वजन 2560 किलोग्राम और अधिकतम सामान उठाने की क्षमता 2050 किलोग्राम तक है।  साथ ही इसमें 2 WD व्हील ड्राइव दिए गए है। इसके अलावा इसमें कैट 1 और कैट 2 गेंदों (कॉम्बी बॉल) के साथ लगे लिंक दिए गए है। 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर में अन्य उपकरण 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट मॉडल के ट्रैक्टर(massey ferguson 9500 smart tractor) में कंपनी कुछ जरूरी उपकरण भी देती है, जिसका इस्तेमाल किसान जरूरत के समय पर आसानी से कर सकते हैं। 


अन्य उपकरण- स्मार्ट हेड लैंप, स्मार्ट की, स्मार्ट क्लस्टर, चटाई - पैर कदम, नया ग्लास डिफ्लेक्टर, सहायक पंप फ्रंट वेट स्पूल वाल्व आदि। 


मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर की कीमत (massey ferguson 9500 smart series price) 


इस कंपनी के द्वारा तैयार किए गए ट्रैक्टर किसान भाइयों के लिए बेहद किफायती होते है। मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर की कीमत (massey ferguson 9500 smart tractor price)  लगभग 8.40 लाख से 8.90 लाख* रुपए तक है।  


किसान भाइयों द्वारा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 


प्रश्न- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट कितने HP का ट्रैक्टर है? 

उत्तर- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट एक 58 HP का ट्रैक्टर है। 


प्रश्न- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर में डीजल टैंक की क्षमता क्या है ?

उत्तर- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर में 70 लीटर की डीजल टैंक की क्षमता है। 


प्रश्न- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट  ट्रैक्टर की कीमत (massey ferguson 9500 smart series price) क्या है?

उत्तर - मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर  की कीमत 8.40 लाख से 8.90  लाख* रुपए तक है।  


प्रश्न- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर में कितने गियर दिए गए है?

उत्तर- मैसी फर्ग्यूसन 9500 स्मार्ट ट्रैक्टर  में 8 फॉरवर्ड + 2 रिवर्स गियर दिए गए है। 


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